व्यर्थ है
By Utkarsh Mishra
व्यर्थ है अगर चल रहे हो तुम,
बिना मंज़िल जाने, पहचाने
व्यर्थ है अगर तुम्हारा मोह,
निग़ल चुका है तुम्हारा तेज
व्यर्थ है अगर तुम्हारी हँसी उल्लास का सूचक नहीं
सामाजिकता ज़िंदा रखने का ज़रिया मात्र है
व्यर्थ है अगर तुम नहीं संभाल सकते
अपने डगमगाते क़दम
और ढूंढने लग जाते हो सहारा लड़खड़ाते ही
व्यर्थ है अगर नहीं झलकता
तुम्हारे प्रेम से अनंत शौर्य
बस रह जाए वह सिमट कर
एकजीवंतउदाहरणतुम्हारीनिर्बलताका
By Utkarsh Mishra

Comments