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वो लोग

May 5, 2023
3 min read

By Rachana Mallick


गुमनाम गाँव देहातों की गुमनाम गलियों में

रहने वाले लोग...

जर्जर से कच्चे घरों में रहने वाले लोग

अधनंगे बच्चों को सूखी रोटी खिलाकर

पालने वाले लोग...

फटे कपड़ों पर बार बार पैबंद लगाने वाले लोग

ढ़हती दीवारों.., टूटती छतों की रोज

मरम्मत करने वाले लोग

टूटे-फूटे कालिख लगे बर्तनों को सहेज कर

आलों पर रखने वाले लोग... |


ईंट की धधकती भट्टियों में

झुलसते हुए लोग....

दूसरे के खेतों में मजदूरी करने वाले लोग

चिलचिलाती धूप में सड़कों पर

कंकरीट बिछाते लोग...

पीठ पर नन्हें बच्चे को बाँध

सिर पर ईंट-गारा-पत्थर ढ़ोने वाले लोग

दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद चंद रूपये कमाने वाले लोग |



चौदह पार करते ही काम की तलाश में

दिल्ली-मुंबई-पंजाब जाने वाले लोग

माँ की दी पैंट–शर्ट-गमछा-चादर सीने से लगाए

अंजान सफ़र पर निकल जाने वाले लोग


ट्रेन के ठसाठस भरे जनरल डिब्बे में

अक्सर दिखने वाले लोग

अजनबी शहर की चकाचौंध में खो जाने वाले लोग |

अपने ही देश में कुछ कम आंके जाने वाले लोग

लोगों के ताने-सुनने वाले लोग

हर जगह दुत्कारे जाने वाले लोग

हँसी-मजाक का पात्र बन जाने वाले लोग

अपमान का घूँट पीकर जीने वाले लोग

उम्र से पहले उम्र जी जाने वाले लोग |


ढ़ाबों में काम करने वाले लोग

ऑटो-रिक्शा-टैक्सी चलाने वाले लोग

कारखानों में काम करने वाले लोग

सड़क के किनारे चाट-भेलपुरी का ठेला लगाने वाले लोग |

हमारे-आपके लिए कपड़ा बुनने वाले लोग

देश के लिए अनाज उगाने वाले लोग

दस्तकारी की अमूल्य विरासत को

जिन्दा रखने वाले लोग

ईमारतों को जमीन से आकाश तक

ईंट-दर-ईंट उठाने वाले लोग |

विकास के चमकते चेहरे के पीछे छिपे

मैले-कुचैले कपड़ो और बीमार चेहरों वाले लोग |


कम पैसों में ज्यादा काम करने वाले लोग

हर हुनर में पारंगत

फिर भी दर-दर की ठोकरें खाने वाले लोग

किसी की गाली ---, किसी की मार खाने वाले लोग

अपने अधिकारों से बेखबर

हर कदम पर शोषित होने वाले लोग





कर्ज के बोझ तले दबे

असल और सूद के गणित में उम्र गंवाते लोग |

भूख से कम खाने वाले लोग

पैर सिकोड़ कर सो जाने वाले लोग

देहाड़ी पर काम करने वाले लोग

रोज कमा रोज़ खाने वाले लोग


गाँव के घर में खुशहाली लाने के लिए

‘परदेस’ में खुद को मिटाते हुए लोग |

बेनाम से ..., बेघर से लोग

समाज में उपेक्षित..., अस्वीकृत से लोग

भीड़ में अदृश्य होते...., अस्तित्वहीन लोग

पहचान गंवाते लोग..., अन्याय सहते लोग

‘प्रवासी मजदूर’ कहलाए जाने वाले लोग... |


लौकडाउन में रोजी-रोटी गंवा चुके लोग

घुटन भरे कमरों में बैठे दस-बारह लोग....

रात के सन्नाटों में

अपनी बेबसी..., अपनी लाचारी पर आंसू बहाते लोग

आधी-अधूरी जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे लोग...|

खाने की गाड़ियों का सुबह-शाम

इंतज़ार करते लोग

खाने के लिए छीना-झपटी करते लोग

एक पैकेट को पूरे परिवार मे बांटते लोग

बच्चों को खिला..., खुद पानी पीकर सो जाने वाले लोग |


घुटन और लाचारी से बौखलाए हुए लोग...,

पाई-पाई को मोहताज़ हुए लोग....

सब्र का बांध टूटा तो

सड़कों पर उतर आए ये लोग |

पुलिस के लाठी-डंडों की मार सहकर भी

डटे रहे ये लोग

अंतरात्मा को झकझोर

अपने सवालों का जवाब मांगने लगे ये लोग |


सामने आ गए ये लुका-छिपे से रहने वाले लोग

सरकार को आईना दिखा गए ये लोग

अपनी बदहाली... अपनी दुर्दशा से

विकास का तिलिस्म तोड़ गए ये लोग

इंसानियत को शर्मसार कर गए ये लोग

सीना ठोक कर अपने होने का अहसास करा गए ये लोग |

सरकारों को ललकार उठे ये लोग


सिर पर कफ़न बाँध कूच कर गए ये लोग

गरीब की हिम्मत और हौसले की

मिसाल बन गए ये लोग

अपने अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय से

सबको हैरान कर गए ये लोग |

एक-एक कदम बढ़ा हज़ारों मील का सफ़र

तय कर गए ये लोग

तपती गर्मी और आग उगलती सड़कों पर

चलते रहे ये लोग |

सड़कों पर दम तोड़ते रहे,

रेल की पटरियों पर कटते रहे ये लोग

रेल के डिब्बों में ...., ट्रकों के हादसों में

जान गंवाते रहे ये लोग |

अपनी बेबसी..., अपनी गरीबी की कीमत चुकाते रहे ये लोग


हर इंसान को गुनहगार बना गए ये लोग

इंसानियत को शर्मिंदा कर गए ये लोग

लोगों की अच्छाई पर प्रश्न चिन्ह लगा कर गए ये लोग

कितना काम बाकी है....., ये अहसास करा गए ये लोग |

जोखिम भरे जानलेवा सफ़र के बाद

आख़िरकार गाँव पहुँच राहत की साँस लेते लोग |

गाँव के बाहर ही रोक लिए गए ये लोग....|

बदले-बदले से गाँव में... बंद किवाड़ो .... बंद खिड़कियों

बंद दुकानों ...., सूने मैदानों कों ... को ताकते रहे ये लोग

सहमी सी..., थकी-हारी ..., भूखी-प्यासी जिंदगी कों ...

मर-मर कर जीते रहे ये लोग |

न इस जहान के..., न उस जहान के ये लोग |

क्या हो गर हों ही ना यें लोग ||



By Rachana Mallick





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