वो पहला गुलाब
By Devanshee
आज बात हुई उस पहले गुलाब से
बंद था जो मैली एक किताब में
मुरझाया सा वो मुस्कुराकर बोला
आज क्यों तुमने यादों का संदूक खोला
याद तो होगी तुम्हे मेरी कहानी
थी तुम किसी के प्यार की दीवानी
जब घुटने पर बैठ उसने मुझे दिया
तुमने भी हाथ थाम बढ़ाई नज़दीकियां
दिन भर तुमने मुझे बालों में सजाया
उसकी आंखों में देख तुम्हारा दिल इतराया
मेरी खुशबू में उसके प्यार की महक थी
उसके साथ से तुम्हारे चेहरे पर चहक थी
देखती रही तुम उसका चेहरा मेहताब में
फिर सजों दिया तुमने मुझे इस किताब में
आज सालों बाद भी लाया वो गुलाब है
सजाया बालों में उसकी रानी का खिताब है।
By Devanshee

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