वो गौरैया
By Sadhana Joshi
वो आंगन में ठुमकने वाली गौरैया
कभी दूर मत जाना।
कहीं विलुप्त मत हो जाना,
तुम मुझमें चेतना जगाती हो।
उमंग भरी है तेरी उड़ान में,
जोश होता हरपल की उछाल में।
चेतना फैलाता तुम्हारा कलरव,
आंगन को सजाता तुम्हारा खेलना।
झुंडों में सखियों संग पंखों की फड़फड़ाहट,
बड़े सलीके से दाना चुगना।
चोंचों को पंखों पर साफ करना,
अपने पंजों से अंग अंग खुजलाना।
दाना खाकर इधर उधर,
नज़रें घुमाना।
कहीं तुम्हें कोई खतरा न पहुचाये।
समझ दार हो तुम,
जानती हो अपने को बचाने का हुनर।
हमारी हल्की सी चहलकदमी ,
को सुनकर फुर्र से उड़ जाती हो।
दूर डाल पर सुरक्षित रहने केलिए,
वो प्यारी गौरैया फिर से लौट आना कल।
By Sadhana Joshi

Comments