वो कुछ और है
By Rajat Bhadoria
बारिश होती एक सी हर दफा पर तेरा भींगना कुछ और है,
साँसें दौड़ती यूँ देख के कि दिल का धड़कना कुछ और है!
हवाओं का रुख बदल सा जाता है गुल भी खिल उठते हैं,
होश अच्छा पर तेरी वजह से बेखुदी में होना कुछ और है!
हसीन मदमस्त नज़ारें क्या देखेगा कोई बताएगा कोई,
तेरी भींगी ज़ुल्फ़ों का तेरे चेहरे पे यूँ गिरना कुछ और है!
मेरे मुताबिक़ चले जो ये वक़्त तो इसे यहीं पर रोक दूँ,
मुझसे शर्मा कर तेरे गालों का सुर्ख हो जाना कुछ और है!
By Rajat Bhadoria

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