वो कदमों के निशान
By Amita Grover
वो कदमों के नशा जो रेत पर अकेले पड गए थे तुम्हारे
मैने उन पर अपने क़दम बछा। दये है ।
वो जेा धीमे से मिटे जा रहे थे
उनकाेमेरे कदमाो ने अाैर गहरा बना दया है
पर देखाे वाे बेरहम लहरे आ रही है
जाे मटा देंगी नशां हमारे तुम्हारे
बस रह जायगी वो गीली रेतऔर उस पर बखरे शंख और सीिपयां
क्या चुन लूं उन सििपयों को याद बना कर समेट लूंगी
ओर भी क़दम आएेगे हमारे बाद उनके नशां भी मट जाएगे ।
क्योंकि लहरों के इरादे वैैसे है
पर रुको,वो देखो
अब हमारे कदमों के नशानो पर
हमारे बच्चों ने अपने नशा गाड दए है ।
और हमारे नशा आज कितने गहरे हो गए है ।
By Amita Grover

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