वो एक बक्सा लेकर आता है
By Shivam Mishra
वो एक बक्सा लेकर आता है
भरी होती हैं जिसमें
हज़ारों खुशियाँ और ग़म
कई मुस्कराहटें, आँसू, ठहाके और चीखें,
भरा पड़ा होता है वो बक्सा
न जाने कितनी कहानियों से
कितने किरदारों से।
कहानियाँ जो एक नई खिड़की खोल देती हैं
हमारे मन की दीवारों में
जिसमें से देख लेते हैं हम एक नई दुनिया,
किरदार जो हमारा हाथ थामकर, ले चलता है हमें
उस जगह , जहां हम जाना नहीं चाहते
और वहाँ भी, जहां हम कई बार जा चुके हैं।
हम सब भूल जाते हैं, उस एकांत में जाकर,
उस किरदार का हाथ पकड़े हुए
नहीं याद रहती अपनी दुनिया, अपनी कहानी,
ना ही अपना किरदार
परत दर परत कुछ खुलता जाता है अंदर
और एक आँसू निकल आता है ठीक उसी समय,
जब अखिरकार उस किरदार से आँख मिलती है
रोना नहीं आता, बस आँसू आते हैं।
जिन्हें वो अब
अपने खाली हो चुके बक्से में समेट लेता है
बड़े करीने से, एक एक करके,
और जिस दिन, उसका ये बक्सा
भर जाता है, ऐसे आँसुओं से,
वो उसे उठा करके चल देता है।
फ़िर ख़त्म हो जाती है कहानी,
यूँ ही अचानक, जैसे शुरू हुई थी
और मानो एक बेहोशी से जागते हुए,
हम ढूँढते है, उस किरदार को,
पागलों की तरह, यहां वहाँ
और पाते हैं उसे, अपने ही भीतर कहीं,
सुरक्षित! सजीव!
सच कहा है कि
कहानी ख़त्म हो जाती है, पर किरदार हमेशा जीवित रहते हैं
By Shivam Mishra

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