वो इंतज़ार
By Menka Gupta
आँखें इंतज़ार में जिनके बह चली है
वो नजाने किस डगर किस गली है
हर पल ये दिल करता है उन्हें याद
क्या उन्हें इस बात की खबर मिली है ?
बाँह उनकी थामने को हम तरस जाते हैं
उनके होने के एहसास से मुस्कुरा जाते हैं
शिद्धत बहुत है बुलाने में मगर
इस भीड़ में कही हम खो जाते हैं
मन में चिंतन गहरा जब हो जाता है
उन्हें पाने को फिर ये जी चाहता है
दुनिआ में चाहने वाले बहुत है उनके
मगर उनसे मिलने को ये दिल तरस जाता है
सावले से चहरे पर मंद मंद मुस्कान
आँखों में चमक और नज़रो के वो बाण
देख रहे हो जैसे सपनो में हमें
ना मिले वो तो कही छूट न जाये ये प्राण
मीरा की लगन से लगना पड़ेगा
प्यार उनसे बेशर्ते करना पड़ेगा
मिलेंगे जब वो किसी जनम में हमें
दुनिआ में आने का फल तभी मिलेगा
By Menka Gupta

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