विष अमृत
By Abhilasha Purohit
एक ऐसी सुबह होगी,
जब पहली किरण में नहाओगी तुम
जब मुस्कुराओगी तुम
जब सुबह होने का तुम्हे अफसोस ना होगा
जब सब कुछ उतना मनहूस या खामोश ना होगा…
जब कविता राइम करने को तुम शब्दो को कुछ भी के फॉर्मेट में लगाओगी
जब खुशियो का तार तुम जिंदगी के सॉकेट में लगाओगी
जब बिना झिझक तुम खिलखिलाओगी
एक सुबह ऐसी होगी…
जब तुम खुद पर ना झल्लाओगी
जब तुम मुस्कुराओगी
कोयल की आवाज़ में अपना ध्यान लगाओगी
निम्बोली की खुशबू से प्राण ले आओगी
जब तुम बीती हर बात और रात को भूल जाओगी
नए सवेरे में..
दिन भर के प्लान बनाओगी
जब फिर से अपनी लिखी कविता सबको सुनाओगी
जब फिर से राइटिंग शेड्यूल बनाओगी
जब फिर से डेडलाईन को महत्वपूर्ण बताओगी
जब तुम हर कोशिश से खुदको सम्पूर्ण बताओगी
जब तुम टेढ़े मेढ़े शब्दो को जोड़कर साफ बात लिख जाओगी
जब तुम सीधी साधी बात को गोलकर घुमाओगी
जिंदगी का रायता बनाओगी, अपनी हंसी की बूंदी से इसे सजाओगी.
कभी नमक तो कभी शक्कर डालकर पी जाओगी
फिर सांसो के फैले दही की बुराइयों पर भाषण पिलाओगी
फिर कोई दिन तुम सखियो को अपना गाना सुनाओगी
फिर कोई दिन उनके intestine में हुक डालकर अपनी तारीफ निलवाओगी
इश्क की महिमा में ग्रन्थ लिखती जाओगी
दुसरो की मोहब्बत के किस्सों को
Awee awee करते हुए खुशी से चिलाओगी
अपनी सच की दुनिया मे फिल्मी कहानिया सजाओगी
फिर कोई दिन random लड़को को सहेलियों का जीजा बताओगी
नही!! ये तुम अब कभी नही कर पाओगी
अब तुम कभी किसी पर रीझ नही पाओगी
अब तुम कभी प्रेम की कविताओं को सींच नही पाओगी
अब तुम कभी प्यार, इश्क, मोहब्बत लिख नही पाओगी
अब तुम कभी खुश दिख नही पाओगी
अब तुम कभी सपने या सच मे प्रीत नही पाओगी..
अब तुम कभी मीत के गीत नही गाओगी
अब तुम कोई किस्सा, कहानी कविता किसी को ना सुनाओगी
अब तूम कोई भी मसला दिल तक ना ले जाओगी
लेकिन एक बात है बहिन!!
अब तुम्हे इसकी कभी जरूरत नही होगी
अब तुम्हे कभी लिखने की हसरत नही होगी
अब तुम्हे कभी चांद वैसा नही दिखेगा
अब कोई तारा तुम्हारी नजर से नही टूटेगा
अब कोई ऐसे फिजूल से ख्वाहिशनही होगी
अमृत ही अमृत होगा जीवन के इस खेल में
अब कोई सांस तुम्हारी विष नही होगी।
एक सुबह ऐसी होगी..
जिसमे तुम बेमतलब ही मुस्कुराओगी
बेमतलब खिलखिलाओगी
कुछ लिखो पढो या नही
किसी से कहो सुनो या नही
कोई समझे या समझे नही
तुम खुद को भी
जीवन प्रीति का ही सच बताओगी
बस फिर क्या??
जिंदगी जीती चली जाओगी..
By Abhilasha Purohit

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