विश्वास
By Yashaswi Agrima
फिर टुटने की चाहत की थी इन उम्मीदों ने
फिर आपके हाथों में थम गए,
फिर झुकाया इस सिर को
फिर डगमगाते कदम संभल गए।
फिर ढलने लगी थी ये शाम
फिर सपनो में हम बिखर गए,
फिर आपकी सुबह आई
और हम फिर से सवर गए।
फिर गीत की धुन सुनायी दी
फिर उस रोशनी में हम खीचे चले गए,
फिर विश्वास हुआ खुद को खुद पे
और हम फिर आपके दर पर निखर गए।
By Yashaswi Agrima

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