विद्रोह
Updated: Dec 3, 2022
By Deepali Bhatia
वो लोग विद्रोह की बात करते हैं,
जो अपने ही घर में आवाज़ उठा नही पाते!
कुछ बेहतर के लिए
अपनों को ही नाराज कर नहीं पाते!
ख़ाक वो विद्रोह कर पाएँगे,
जो प्रेम तक कर नही पाते!
अपने घाव भरो, विद्रोह करो!
लोगों को नाराज़ करके तो देखो,
दुनिया का अंत नहीं होता है!
पर याद रहे,
विद्रोह खयालात पर हों,
व्यवहार पर हों,
परिस्थितियों पर हों,
इंसान पर नहीं !
प्रेम का अस्तित्व सदा ही बना रहे,
इसके लिए विद्रोह करते रहो!
By Deepali Bhatia

Comments