वह रास्ते
By Anisha
एक गहरी दोस्ती हो गई है उन रास्तों से,
कुछ बरस पहले जो अजनबी से लगते थे।
अपने कदमों के निशान ही मार्गदर्शक लगते हैं,
कल तक जो सिर्फ़ पीछे छोड़े ख्वाब ही लगते थे।
ख्वाहिशों की वह संकरी गलियाँ,
जहाँ से गुज़रकर ख्वाबों की मंजिल मिली थी,
काफ़ी ऊँचे पेड़ हैं अब वहाँ, जहाँ एक दिन
आकाश को छूने की कली खिली थी।
आज फिर उन गलियों से गुज़रने की
अनायास अभिलाषा मन में आई है,
जहाँ मेरा पौधा एक पेड़ बना था,
शायद वहीं एक नई कली खिल आई है।
By Anisha

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