वह पीपल का पेड़
By Neeru Gupta
कई दिनों से मेरे मन में एक जिज्ञासा है उठ कर आई,
क्या जीवन जीने की कला केवल महान पुरुषों की गाथा और हमारे धार्मिक
ग्रंथों में ही है समाई?
क्या रोजमर्रा की साधारण वस्तुओं ने कभी हमें कोई सीख नहीं है सिखाई?
जबकि ईश्वर ने तो कुदरत के जर्रे -जर्रे में जादुई प्रेरणा है छुपाई|
वर्षों से आते -जाते राह में खड़े एक पीपल के विशाल पेड़ को ताकती हूं,
हर बदलते मौसम में उस पेड़ के स्वरूप को निहारती हूं|
पतझड़ के मौसम में जब उसकी चिकनी- हरी पत्तियां टूटकर गिरती है,
तब उस वीरान पेड़ में मुझे एक तपस्वी की झलक दिखती है|
जो जिंदगी में संतोष और समर्पण की अहमियत बताता है|
नए पत्तों की आने की प्रतीक्षारत रह मुझे धैर्य और विश्वास का पाठ पढ़ाता
है|
;समय हमेशा एक सा नहीं रहता; जीवन के इस अमिट सत्य से वह मुझे
रूबरू कराता है|
वह पीपल का पेड़ ,मेरा प्रेरणास्रोत बन मुझे जीवन का सही मार्ग दर्शाता है|
By Neeru Gupta

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