वर्णन
By Vishal Mheshvree
बा तें उसकी ऐसी लगती जैसे गी त सुना ती हो , केश उसके खरे ऐसे वा यु जैसे लहरा ती हो । कमर उसकी ना न जैसी ,मो ती जैसी आंखें हैं, को मल गुला बी हों ठ उसके थो ड़े- थो ड़े बां के हैं। आंगन में है मो र जैसी ,जंगल में रण जैसी है,
का ले घो र अं या रे में वो सूर्य रण के जैसी है। गो रे गो रे गा ल पर उसके एक दी छो टी का ली है, भो ली सी है सूरत उसकी वो सौ -सौ नखरे वा ली है। बा जे पा यल पैरों में, कंगन थो ड़े चमकी ले हैं, उसके म की बा श में सब हके गी ले गी ले हैं। ठुमक-ठुमक कर चलती है,मधुबा ला सी लगती है, ऊपर से नी चे जब देखो पूरी
मधुशा ला लगती है। हा थ उसके मखमल जैसे,रंग नी र सा लगता है, उसकी आंखों का शा ना ल पर ती र सा लगता है। यौ वन उसका र ट जैसा हर पल रंग बदलता है, उसको जब भी देखूं मन अ कुंड में जलता है। धरा ची र कर मका ल में पला श जैसे लता है, उसका म भी लकुल वैसा कठो र तप से लता है। दा मन उसका था म कर चलना सी धा -सा धा सपना है,
उसको व त करने का मत सबका अपना -अपना है।।
By Vishal Mheshvree

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