वक्त है संभल जाओ
Updated: Sep 16, 2025
By Anita Singh
भारतमाता सिसक रही है, हम सबकी नादानी पर, कैसे दाग लगा जाते हम,भारत माता की पेशानी पर। एक ही खून एक सा भोजन, एक ही बोली बात, एक ही घर में रहते हैं हम,फिर क्या जाति क्या पाति, तलवारें खींच लेते हैं हम,किसी झूठी एक कहानी पर, कैसे दाग लगा जाते हम!! भारत माता की पेशानी पर। भाई भाई को गले लगाकर, सीने में खंजर भोंक रहा, बाहरवाला घर में घुसकर, अपनी रोटी सेंक रहा, संभल जाओ और रोक लो खुद को,पछताओगे इस नादानी पर, कैसे दाग लगा जाते हम !! भारत माता की पेशानी पर।
By Anita Singh

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