वक्त सिखा देगा तुमको
By Rashmi Gupta
ठोकर खाने पर
रुक के संभलना भी
और फिर से चलना भी।
थक जाने पर
थोड़ा थमना भी
और चलते रहना भी।
टूट के बिखरने पर
आईना बनना भी
और संवरना भी।
नियम उसूलों को परे रख
सबकी सुनना पर
दिल की कहना भी और करना भी।
नैनों की जुबां को
हर्फ का लिबास दे कर
कुछ अपनी कहना भी
अनकही सुनना भी।
और गर सिखाने लगे वक्त
अपना वजूद भुला कर
भीड़ में शामिल होना
खुद को खुद सा रखना भी ।
By Rashmi Gupta

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