वक्त को वक्त दो...
Updated: Jun 9, 2023
By Ananya Joni
हम सब जानते हैं कि वक्त का पहिया हमेशा आगे बढ़ता है, पीछे कभी नहीं मुड़ता। तो वक्त रहते सब कर जाने में क्या बुराई है? वक्त बहुत ज्यादा ताकतवर है... कभी भी पलट जाता है! कुछ रिश्ते उलझा देता है, तो कुछ गिले-शिकवे सुलझा भी तो देता है। वक्त न जाने क्या-क्या सीखा जाता है... कभी थमना तो कभी किसी को थामना कितना जरूरी होता है। दो शब्द...चाहे वह प्यार का इजहार हो, माफी हो, रूठना, मनाना हो...
जो भी हो वक्त रहते बोल देना चाहिए। न जाने कब क्या हो जाए!
कभी-कभी हम जिम्मेदारी के बोझ में और काम के तनाव में इतने मशगूल हो जाते हैं ना...
कि हम वक्त को वक्त देना भूल जाते हैं!
कहां भागे जा रहे हो? रुको, जरा बैठो और सोचो!
घावों को भरने में वक्त लगता है,
बुरे ख्याल से पीछा छुड़ाने में वक्त लगता है,
बुरी यादों को धुंधला होने में वक्त लगता है,
बीते हुए कल के चपेट से निकलने में वक्त लगता है।। इसलिए वक्त को वक्त देना सीख जाओ सब ठीक हो जाएगा।
दो मिनट के लिए सही बस रुक जाओ, थोड़ा संभल जाओ।
फिर शुरू से शुरू करेंगे...
वह डगमगाते कदम भी, शायद कल उड़ान भरेंगे।
धीरज रखना मतलब उम्मीद का जिंदा रहना!
और इसी उम्मीद से तो यह दुनिया कायम है।
वक्त के आगे नहीं वक्त के साथ चलना सीखो।
घड़ी के कांटों से शिकायत नहीं दोस्ती करना सीखो।
वक्त को वक्त दो प्यारे...सब ठीक हो जाएगा!
By Ananya Joni

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