लिफाफा
By Sanat Raj
लिफाफे पर है नाम मेरा,
अंदर रखे जज़्बात खाली है,
रखी है अंदर एक तस्वीर भी,
तस्वीर में पहनी मेरी बाली है,
है रखा एक फूल भी,
जो अब फूल नहीं सूखी डाली है,
इन बिखरे पंखुड़ियों का,
अब कोई नहीं माली है,
एक पुर्जे पर लिखा वो तारीख भी,
जो अब एक रात काली है,
लिखा है एक सच भी,
जिसे ना जाने मैंने कब से टाली है,
पर आखिर में ये समझ आया,
कहां एक हाथ से बजती ताली है,
कि कर दिया ऐलान लिफाफे ने,
अब कहां वो लौट कर आने वाली है।
By Sanat Raj

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