ललकार
By Narjeev Singh
जन्म से नहीं
कर्म से जात बनाओ
ओ धर्म के ठेकेदारों
अब तो समझ जाओ
कब तक बांटते रहोगे
तुम इस देश को
कभी धर्म के नाम पर
कभी जात के नाम पर
कब तुम छोड़ेंगे
कटरवाद की धारणा को
क्या कभी जीने देंगें
तुम यहाँ इंसानों को
कब बंद करेंगे तुम
जनता के पैसों से
चलने वाली दुकानों को
जीवन का समय है चार दिन
कब तक भरोगे खज़ानों को
कब तक धर्म परिवर्तन होता रहेगा
मानव अपने वजुद के लिए
क्या यूँ ही लड़ता रहेगा
क्या कभी कोई बोलेगा नहीं
कब तक चलेगा ऐसा
कब तक ये सब झेलता रहेगा
By Narjeev Singh

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