लक्ष्मी बाई
Updated: Sep 16, 2025
By Anita Singh
आज़ादी के हवन की पहली आहुति, तुम्हें शत् शत् नमन है, तुमने इस भूमि को अपने लहू से किया पावन है। तुम्हें शत् शत् नमन है, तुम्हें शत् शत् नमन है। तुमने तलवारों से खेला, आजादी का खेल पहला, तुमने लहू से कर लिया था,अपना पूर्ण श्रृंगार पहला, तुमने झुकना नहीं मरना बेहतर समझा, तुम्हें शत् शत् नमन है, आज़ादी के हवन की पहली आहुति, तुम्हें शत् शत् नमन है।
आंखों में आसूं ना था,सिर्फ चिंगारी पलती थी, आजादी के सपनों को दिल से नहीं, तलवार तोलती थी, मरण या मारो तेरे संकल्प थे रानी, तुम्हें शत् शत् नमन है, आज़ादी के हवन की पहली आहुति, तुम्हें शत् शत् नमन है। या पराजय या फिर तू प्राण दे,या फिर ये वेदना स्वीकार ले, या कि ले तलवार और चल काली का अवतार ले, तुमने दिया बलिदान वो सदा अमर है, तुम्हें शत् शत् नमन है, आज़ादी के हवन की पहली आहुति, तुम्हें शत् शत् नमन है।
By Anita Singh

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