रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा
By Vishesh Khandelwal
रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा बुरे हालात को सोच सोच के, यूँ तू ना घबरा जब दुनिया को परवाह नहीं, तो तू बन बेपरवाह रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा
कभी हालात से हार गया, कभी वक़्त से हार रहा सबकी यूँ सुनते सुनते, तू हो बेक़ार रहा हस्ती ना मिटने दे अपनी, तू दिल से इंसान बड़ा रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा
कुछ लम्हे तू टूट गया, कुछ डर के जीता रहा तन्हाई के लम्हो में, अपनो से दूर रहा वक़्त बुरा नहीं होता, कर्मा तुझे मार रहा रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा
एक पल में अपने पराये हुए, सोच पे गहरा असर पड़ा कोई ना तेरे साथ चला, ना कोई साथ खड़ा अकेले जीवन जीकर भी, ज़िन्दगी का मज़ा उठा रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा
सबको खुश करने की कोशिश में, तू निराशा बाँट रहा जिनके लिए तू कभी रोया, कभी हंसी ढूंढ रहा सबका सुख तेरे हाथ नहीं, बस अच्छा करता जा रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा
इच्छाओं का गला घोंटा, जीना मक़सद ना रहा इस अन्जानो की दुनिया में, मिलना मकसद ना रहा हर मोड़ नए दोस्त बना चल, हँस सेवा करता जा रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा
इस बात से परेशान ना हो, तुझे कोई भी ना समझा आगे भी ऐसे पल आयेंगे, तू होना चाहे फ़ना जीवन इसी का नाम है प्यारे, तू खुल के जीता जा रोता क्यूँ है साले, तू आगे बढ़ता जा, तू आगे बढ़ता जा
By Vishesh Khandelwal

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