रो कर देखा
By Kuldeep Kumar
अपने आप में खो कर देखा, एक अरसे तक सो कर देखा, थक सा गया हूँ अकेलेपन से तभी, आज थोड़ी देर रो कर देखा, बहुत अभिमान था इस अकेलेपन पर मुझे, बहुत साथ देता था ये अक्सर मुझे, कभी नहीं खुद को एक से दो कर देखा, आज अपने आप में खो कर देखा।
गहराई तक तन्हाई समाई है, बात आँखों से होठों तक आई है, चेहरे को पूरा आंसुओं से धो कर देखा,
अपने आप में खो कर देखा, आज थोड़ी देर रो कर देखा।
By Kuldeep Kumar

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