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रे पथिक तू क्या ताकता!

May 3, 2023
1 min read

By Kirti Thakur


रे पथिक तू क्या ताकता !

रे पथिक तू क्या ताकता !

है क्यूं अतीत में झाकता

रे पथिक तू क्या ताकता !

सामने खड़ी है दो डगर

चुन ले चुन सके अगर

ध्यान रख इतना मगर

बहुत ही लंबा है सफर

मंजिल मिलती है उसे

जो मुश्किलों से नहीं भागता

रे पथिक तू क्या ताकता !

रे पथिक तू क्या ताकता !

राहो में कांटे भी मिलेंगे

उनकी तू चिंता न करना

जब लगे “अब और नहीं “

तनिक सा धीरज और धरना

शूल फूल में बदलेगा इक इक

बिखराएगा परागता



रे पथिक तू क्या ताकता!

रे पथिक तू क्या ताकता!

पग बढ़ाने से भी पहले

बांध ले तू गांठ एक

जैसे - जैसे आगे बढ़ेगा

काल परखेगा विवेक

कसौटियों के सम्मुख रहकर

सिद्ध कर अपनी परिपाकता

रे पथिक तू क्या ताकता

रे पथिक तू क्या ताकता!

मंजिल मिलेगी; यशगान होगा

जिसका तुझे अभिमान होगा

मौन होगी मंजिल तेरी

तेरे श्रम का ही बखान होगा

चरम पर भी पहुचेगा इक दिन

गर रहेगा मद को त्यागता

रे पथिक तू क्या ताकता

रे पथिक तू क्या ताकता


By Kirti Thakur




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