रूह से रूह की बाते।
By Abhijeet Santosh Gawande
बेचैनी भी होगी,
बेताबी भी होगी,
इश्क़ के मंजर में तुम्हारे,
कुछ अनकही,
कुछ अनसुनीसी, बातें भी होगी।
झिलमिलायेंगे पंछी,
झुम उठेगा ये आसमा,
स्वर्ग से सुंदर भाती,
खुबसूरत, ये धरती भी होगी।
पलकों से पलके ना मिलेगी,
करवटे भी बदलनी पड़ेगी,
इबादत के दौर मे आपके,
जागती हुई रातें भी होगी।
ना धुप से कोई ऐतराज होगा,
ना छाव सुकून दे सकेगी,
युही चलते-चलते राहों में आपके,
बिन मौसम बरसाते भी होगी।
नजरों से नजरें जब मिलेगी,
हरवक्त मनमे,
एक नई सी उलझन खिलेगी,
दुरियाँ सताएंगी तब आपको,
दिल मे बेवजह धड़कती साँसे भी होगी।
यह सारी हकीकत जब आप जानोगे,
बेइंतहा हमे अपना मानोगे,
एकदुसरे में हम घुल जाएंगे जिसदिन,
याद रखना उसदिन,
रूह से रूह की बातें भी होगी।
By Abhijeet Santosh Gawande

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