रूठे रूठे ए हुज़ूर
Updated: Jun 8, 2023
By Nalini Choudhary
रूठे रूठे ए हुज़ूर फाँसले मिटा लो
राब्ता-ए-ज़िंदगानी सँवर जायेगी
बहुत भीगी हैं पलकें इंतज़ार में
आओ तो फिर मुस्कुरा जायेंगीं
कफ़स बनती साँसें तेरे बग़ैर
दास्ताँ-ए-दर्द सब कह जायेंगी
जो रह गया जिस्म नाचीज़ का
तेरी धड़कनें भी ठहर जायेंगीं
तर्क-ए-मरासिम न करो यूँ जहाँ में
मोहब्बत ही अदावत बन जाएगी
करोगे तिजारत जो मेरे अश्कों से
हथेलियाँ ख़ाली ही रह जायेंगीं
By Nalini Choudhary

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