रुस्वा हुए सनम जो तेरे ही दर से हम
By Manish Joshi
रुस्वा हुए सनम जो तेरे ही दर से हम,
क्या जाएँ लेकर बता तेरे शहर से हम।
जबसे गिराया तुमने अपनी नज़र से हमको,
तब से ही गिर गए ख़ुद की नज़र से हम।
जब से मिला है हमको तुम्हारा ख़त आख़िरी,
उम्मीद नहीं रखते किसी भी ख़बर से हम।
किसी और से करें बात तो ज़ुबाँ लड़खड़ाए,
निकले नहीं हैं अब तक तेरे असर से हम।
By Manish Joshi

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