रिश्तों को भुलाना हमें नहीं आता है |
By Jovita Ekka
रिश्तों को भुलाना हमें नहीं आता है
बस इनको निभाना आता है
क्या करें इतने नादान जो हैं
कि दर दर इन रिश्तों में मिले दर्द को
अपनाना आता है
ख़ैर अब तो ख़ामोशियों से ही रिश्ता जोड़ लिया है
और दर्द में भी मुस्कुराना बस सीख लिया है |
By Jovita Ekka

Comments