रिश्तों की मिठास
Updated: Jan 12, 2023
By Kanchan Joshi
जब भी आगे बढ़ियेगा,
एक काम करियेगा,
पैर ज़मीन, सर आसमान रखियेगा।
क्योंकि,
ज़मीन छूटी तो रिश्ते टूटेंगे,
छूटा आसमान, तो कामयाबी
इसलिए सामंजस्य का ख़्वाब रखियेगा।
गर बने उलझते ऊन से रिश्ते,
तो तानों में अपनी खैर करियेगा
इसीलिए कहती हूँ,
पैर ज़मीन, सर आसमान रखियेगा।
अजीब सी बनावट है इन रिश्तों की,
मेथी के लड्डू की आदत, और रसगुल्ले को मात्र चखियेगा।
सच्चे रिश्ते फ़ीके ही कब थे जनाब
पथप्रदर्शन में ज़्यादा मीठे न बन सके,
सच बताऊँ,
नए रिश्तों की चाशनी में,
लड्डू का स्वाद ज़िंदा रखियेगा।
इसीलिए कहती हूँ,
पैर ज़मीन, सर आसमान रखियेगा।
By Kanchan Joshi

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