रास्ते
By Sheetal Keshtwal
रास्ते चलते रहते हैं
सफर खत्म हो जाता है
लेकिन नहीं खत्म होते ये रास्ते
सदियों से चल रहें हैं
सदियों तक चलेंगे
कभी न खत्म होने वाले ये रास्ते
राहगीर थक जाता है
थकते नहीं ये रास्ते
मंज़िल की तलाश में
कुछ कांटों से होकर
कुछ गुलशन में खोकर
जाने कहाँ ले जाते हैं ये रास्ते
कभी तपती हुई गर्मी में
कभी ठिठुरती हुई सर्दी में
कभी भोर की सुनहरी धूप लिए
कभी रात की काली चादर ओढे हुए
हर राहगीर के साथ चलते हैं ये रास्ते
हर किसी की मंज़िल का पता जानते हैं
हर किसी के हमसफर हैं
थक जाए कोई तो रूक जाते हैं
मिल जाए किसी को मंज़िल तो छोड़कर उसे
आगे चल देते हैं ये रास्ते
इनका कोई आशियाना नहीं
ठहर जाएँ कहीं ऐसा कोई ठिकाना नहीं
न जाने कब इन्हे इनकी मंज़िल मिलेगी
जाने कब ठहरेंगे ये रास्ते।
By Sheetal Keshtwal

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