रावण हूं मै !!
By Himanish Harsh
असुर हूं मै, काल हूं मै,
बुराई की एक मिसाल हूं मै,
ज्ञानी हूं मै , पंडित हूं मै,
भक्त महाकाल का लंकेश्वर रावण हूं मै ।
जला दो मुझे , मिला दो आज राख में,
मै तुमरे अंदर हूं , मिलूंगा अगले साल मै।
सीता माँ का हरण करना सोची समझी चाल थी,
तुम खुद्दारो से पीछा छुड़ाना सोच मेरी साकार थी।
तुम भगवान की पूजा करके किसको पागल बना रहे ,
अपनों पे ज़ुल्म ढा के इंसान किसको बता रहे ।
जूठ का साथ देके , अच्छे कर्म गिनाते हो,
भीड़ में तुम एक बनके, इसको धर्म बताते हो।
तुम्हारी इन हरकतों को ऊपर से हूं मै देख रहा ,
अब तो मै भी बदल चुका हूं सीख तुमको यह दे रहा ,
ज़िन्दगी अनमोल मिली है करो इसका मोल तुम ,
इंसान की सच्ची परिभाषा ना जाओ कलयुग मै भूल तुम,
पाक कर्म ही तुम्हारे तुमको ऊपर (जन्नत) लाएंगे,
सच्ची खुली आंखों से भगवान के दर्शन करवाएंगे।
मौका है तुम्हारे पास ना करो इसे बर्बाद कहीं,
देख कर यह तुम्हारा रुख , फिर उठा ना ले राम शस्त्र कहीं,
अब तक तो मै हर बार अकेला जलता हूं ,
खड़ा ना करदे दुनिया तुमको अगले साल मेरे बगल में कहीं ||
By Himanish Harsh

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