रावण की व्यथा
By Sandeep Rohit
आज है दशहरा, सज गए है आँगन प्रांगण
जा रहे सभी फिर से जलने दशानन
मगर,
मरने से पहले “वो” फिर मन ही मन पछतायेगा
जन- सैलाब में एक भी राम को नहीं पायेगा
इस बार भी क्या रावण को एक रावण ही मारेगा?
रक्त बीज के दंश से क्या यह देश कभी बच पायेगा ?
हर बार जलना और भूल जाना , ये बस गयी है एक प्रथा
और हम सभी भूल गए राम की कथा हो या रावण की व्यथा
आओ दशहरा के मर्म को चरितार्थ करें
रावण-वध के लिए इस दिन का क्यों इंतज़ार करें !!!
By Sandeep Rohit

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