रातें अब होती ही नहीं
By Manish Upreti
आंखों-आंखों में बातें होती ही नहीं
तूफानों में कश्ती खोती ही नहीं
मुद्दतों से बैठा था अरमान छुपाकर
सूनी ये आंखें कभी रोती ही नहीं
ढूंढता फिरता था उसे जहां-जहां
वहां-वहां वो होती ही नहीं
आदत थी इन आँखों को
तिरी तस्वीर देखकर सोने की
खुदा की मर्ज़ी देखो
रातें अब होती ही नहीं
By Manish Upreti

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