रात के इन्तज़ार में
By Bhuvanesh Arya
हरशामकेसायेमें,
जबरातसुहानीचलतीहैं,
मैंरातकेइन्तज़ारमें,
कुछख्यालतुम्हारेबुनताहूँ।
हररोजबातेंअधूरीहैं,
हररोजमैंइन्तजारकरताहूँ,
मैंयूँरातकोताकताहूँ,
कहींकोनेमेंसुबहभीमुस्कुरातीहै,
वहीँचांदभीदगादेताहैं,
सूरजकीपहलीकिरणआजातीहैं।
हररोजबातेंअधुरीहैं,
हररोजमैंइन्तज़ारकरताहूँ,
ख़्वाबोंकातोपतानहीं,
अबयादोंकोहीसजाताहूँ,
औरफ़िरसुबहमजबूरसा,
हरयादबिखरीहुईंपाताहूँ।
हररोजबातेंअधूरीहै,
हररोजमैंइन्तज़ारकरताहूँ।
फिरशामकेसायेमें,
जबरातसुहानीचलतींहै
मैंरातकेइन्तज़ारमें,
कुछलफ़्ज़तुम्हारेदोहराताहूँ।
सबलफ़्ज़अबशायदरूठेहै,
मेरेसाजसुरसबटुटेहै,
मेरीदिलकीधड़कनेभीतोशायद,
तुम्हारेएहसासकोढूँढेहैं।
मैंमंजरमंजरकाटताहूँ,
ज़ज्बातोंकोलफ़्ज़ोंमेंबाटताहूँ,
एहसासोंकीसबख्वाहिशोंको,
मैंरोजरातथपकीयोंसेसुलाताहूँ।
थपकियाँभीअबतोसारी,
थकगयीहैसुलानेमें,
दिलकीधड़कनेभीअबसारी,
रुकसीगयीहैंदरमियानेंमें।
हररोजबातेंअधूरीहैं,
हररोजमैंइन्तजारकरताहूँ,
फिरशामकेसायेमें,
जबरातसुहानीचलतींहै
मैंरातकेइन्तज़ारमें,
कुछराजतुम्हारेलिखताहूँ।
किउंगलियाजबबालोंमें,
घुमातीहोयूँउलझ-सुलझ,
औरलिखतीहोहवाओंपरजैसे,
ख़्वाबोंकोसारेउलट-पलट।
चहकतीहोबरखामेंऐसे,
कीजैसेआसमानआयालेजानेंको,
औरमहकातीहोआँगनकोऐसे,
किकुछअंशधरतीमेसमायाहो।
बादलबादलफिरतीतुम,
यूँगलीमोहल्लेचौबारोमें,
रंगबिखेरतीतितलीहोजैसे,
निकलीशायदआजचारदीवारोंसे।
हररोजबातेंअधूरीहै,
हररोजमैंइन्तजारकरताहूँ,
फिरशामकेसायेमें,
जबरातसुहानीचलतींहै
मैंरातकेइन्तज़ारमें,
कुछवक्तहमारापढ़ताहूँ।
By Bhuvanesh Arya

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