रांझणा क्रिकेटेर
By Shovit Raj
बस , बस इतनी ही कहानी थी मेरी ,
एक बैट थी जिससे मैंने आज तक रन नहीं
बनाया था ,
एक कुछ कोच थे , जो शायद अब भी इसी
उमीद में थे की लौंडा कभी तो मैच जिटवा के लाएगा ,
दो दोस्त थे जो पागल थे ,
एक और बैट थी जो मेरे कारण अपनी आख़िरी साँसे
ग़ीन रही थी , एक पैड था , मेरा ग्लव्ज़ था, मेरी क्रिकेट किट थी
और ये एक हमारा दिमाग़ था जो हमारा साथ छोर चुका था और
ये एक हमारा दिल ,, जिसमें अब भी आग बाक़ी थी,
हम खेल सकते थे , पर किसके लिए!
हम रन बना सकते थे , पर किसके लिए!
हम विकेट ले सकते थे , पर किसके लिए !
मेरे दोस्त , मेरे क्रिकेट किट, स्टेडीयम की वो पिच , सब मुझसे छूट रहा था ,
पर अब रख भी किसके लिए लेते !
मेरे दिल की ताक़त या तो मुझसे रन बनवा सकती थी , या
फिर मेरा विकेट गिरवा सकती थी ,
पर साला अब खेले कौन , कौन फिर से मेहनत करे रोज़ सुबह 5 बजे
फ़िटनेस करने को , रोज़ क्लब में प्रैक्टिस करने को ,
अबे कोई तो आवाज़ दे के रोक लो ,
हमारे कोच जो हर रोज़ हमें प्रैक्टिस करवाते थे,
वो आज भी अगर बोल दे बेटा तू खेल सकता है ,
तो भोलेनाथ की क़सम अभी मैदान में उतर जाय और भारतीय
टीम में शामिल हो जाय ,,,,,,,
पर अब नहीं , अब साला मूड नहीं है, बैट रख देने में ही सुख है ,
किट पैक कर देने में ही भलाई है,,
पर उठेंगे किसी रोज़ , उसी मैदान में रन बनाने को ,
विकेट ले कर ख़ुश हो जाने , भारतीय टीम में शामिल हो जाने को
और गर्व से भारतीय क्रिकेटर कहलानो को !!
(शोभित राज सिन्हा)
By Shovit Raj

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