रहने दीजिए
By Manish Upreti
जाइये
उसे आज़ाद रहने दीजिए
दूरियों की खामोशियों में
आवाज रहने दीजिए
फूल की सी खूबसूरत
झलकियों को देखकर
मन ही मन मुस्काइये
आज रहने दीजिए
अश्क़ को बादल में रखकर
बादलों के कारवां को
आज बहने दीजिये
इश्क़ ए इज़हार की
बेहद हदों को पार कर
आज तक सहता गया गया जो
उसे आज कहने दीजिये
अनकहे अल्फ़ाज़ गुम ये
कल तलक जो ना कहे
उन्हें आज कहने दीजिये
बात हैं ये राज की
इन्हें राज़ रहने दीजिए
By Manish Upreti

Comments