ये शहर
By Ritu Jain
यहां घरों से घर जुड़े हुए हैं।
बस दिलों के रास्ते, थोड़े मुड़े हुए हैं।
ये शहर है, अजनबी रिश्तों से भरा हुआ।
जज़्बातों के लब ज़रा सिले हुए हैं।
यहां शिकायतें हैं,
दूर रहने के लिए ही सारी कवायतें हैं।
पर फिर भी मजबूरी के सिलसिले हैं।
जज़्बातों के लब, ज़रा सिले हुए हैं।
सब कुछ तो है,
पर कुछ भी नहीं।
महफिल तो है, पर तन्हाई भरी।
चाहतें हैं, अरमां भी कहीं।
दिल मिले तो हैं, पर मिले ही नहीं।
दिल मिले तो हैं, पर मिले ही नहीं।
By Ritu Jain

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