ये वादा रहा।
By Chetan Tomar
ये क्या बात थी हममें जो तुम ही समझे,
चाहा ना था कुछ भी, फिर भी तुम समझे
मेरी ही खातिर तुम सबकुछ थे भूले
वादा किया फिर ये बंधन ना टूटे,
सबकुछ था तुममें जाहिर किया ना,
चाहा हमें पर उजाकर किया ना,
मैं ही था वो जो तुमको ना समझा,
मेरी ही खातिर तुम भी बहुतों से रूठे
चाहा था तुमने जो हम दे ना पाए,
अब यूं लगा जैसे सबकुछ था धुन्दला
आँखे खुली तो सबकुछ था बिखरा
बाकी ना रहा कुछ कहने को तुमसे
अब वादा रहा होगी ना इच्छा फिर कभी,
प्रेम था जो भी वो मिट्टी सा होगा
हर पल महकता ये मनसर ना होगा,
सबकुछ तो होगा पर कुछ मेरा ना होगा,
मन तो होगा पर अब चेतना ना होगी,
बाँसुरीतोहोगीपरअबस्वरहीनाहोंगे।
By Chetan Tomar

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