ये लेखन तुझको बांधेगा
By Bhavna Purohit
ये लेखन तुझको बांधेगा
जब शांति को तू साधेगा
जब आस-पास तू झांकेगा
और साथ किसे न पायेगा
खुद से रिश्ते छांटेगा
और उम्मीदों को बांटेगा
तब सबसे भारी बांठ को
तू अपने हिस्से पायेगा
ना सब की गलती मानेगा
अचरज से सोच बिठाएगा
अस्तित्व और आशाओं को
फिर से तिनका भाएगा
जीवन है, चलता है- खुद से खुद को दोहराएगा
और आसमान की ओर देखकर
तू ईश्वर को बस पाएगा
खुद पे प्रश्न उठाएगा
अच्छाई, संदेह में लाएगा
फिर पन्नों पे भाव सजाएगा
और मन भारी ना पाएगा
भाव-शब्द को जब तू अपने
कविताओं में समाएगा
जीवन है, चलता है- उतरता बोझ तुझे सिखलाएगा
ये लेखन तुझको बांधेगा
जब शांति को तू साधेगा
By Bhavna Purohit

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