ये मांजा है या अंगुलियां हैं?
By Surya Kant Pawar
ना जाने ये क्या है, जो दुखता है ?
ये मांजा है या अंगुलियां हैं? क्या घिसता है ?
न जाने ये क्या वज़न है, जो गड़ता है ?
ये सांस है या वक़्त ? जो पाँव रगड़ता है ?
न जाने कौन सा मीठा झरना बरसता है ?
ये आंसू है या ग़म ? ये आब-ए-ज़मज़म कहीं अंदर बसता है ?
न जाने कैसे मैंने तुम्हे ढूंढ ही लिया ?
ये आइना है या परछाई ? बस वही तो अब मुझे समझता है।
न जाने ये कैसी फ़त्ह-मंदी को चूम लिया है ?
चाहे रूह हो या ज़बान| तुम्हारी और हमारी कौन सुनता है ?
ना जाने ये क्या है , जो दुखता है ?
ये मांजा है या आंगुलियां हैं? क्या घिसता है ?
By Surya Kant Pawar

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