ये कलयुग है मेरे नाथ
Updated: Jul 30, 2025
By Harsh Goyal
हे प्रभु धूरा खेचो रथ रोको
अब क्यों प्रलह की तैयारी है
ये कलयुग है मेरे नाथ
यहा क्या दुर्योधन कर्ण और क्या अर्जुन और क्या भीष्म पितामह
यहा सारे अहंकारी है यहां सारे अहंकारी है
अब ना होगा ये कलयुग का अधर्म सहन हमसे
के हे मृतुंज्य अब ना होगा ये कलयुग का अधर्म सहन हमसे
अब किस बात की मून को तुमने ठानी है
ये मानवों की बुद्धि ही तो है प्रभु
जिसने प्रेलेह मचाया विनाशकारी है
इस बिना शस्त्र के युद्ध में
कितने अपने चले गए
यू कितने परिचित मारे गए
शवो के ढेर पर जानवर भी है अब नाच गए
और घर के घर अनाथ हुए
और अर्जुन जैसे हारे गए
और न जाने अभिमन्यु जैसे कितने ही तो मारे गए
सदु संत है खुले आम मरते और कोई कुछ ना बोल पाता है
उस समय पितामह और आज मनुष्य मिथ्य धर्म को श्रेष्ठ बतलाता है
कब मरा वो साधु मुलाना पादरी
ये सबको याद दिलाता है
फिर निर्भया जैसों को क्यों यह कानून और इंसान
इंसाफ देने में कतराता है क्यों इतना समय लगाता है
मंदिर मस्जिद अब है टूट ते
लोग बट गए है अलग अलग धर्म के विचारो में
धर्म तो है बस सत्य का नाम यह भूल गए है अपने दुस्कामो में
अहिंसा परमो धर्म ये सबको याद दिलाता है
धर्म हिंसा तदेव चा फिर ये बतलाना क्यों भूल जाता है
अब तो आपको अवतरित होना पड़ेगा धारा पर
सिखलाने ये पाठ जीवित प्राणियों को
की चाहे कितना ही बुद्धि मान वो बानले
लेकिन मिलता नही स्थान गू लोक में किसी अहंकारी को
के हे राघव माधव मृत्युंजय सुनलो ये अरज हमारी है
की ये तो बिना शस्त्र का युद्ध है प्रभु जो इतना विनाशकारी है
सोचता हु में तो अब की
क्या होगा जब माधव कल्कि अवतार में आयेंगे
क्या वो लड़ने के लिए अश्वथमा और बजरंगी जैसे वीर भी संग में लाएंगे
सीक्षा लेंगे वो प्रशुराम से जो उनको लड़ना खूब सिखलाएंगे
और कलकी अवतार से मिलकर तो भगवन भी न फूले समाएंगे
खुशी का माहोल है अब तो
क्योंकि श्राप का अंत जो निकट में आया है
कल्कि अवतार के बाद में तो
राधा को कृष्ण और मां जानकी को हमेशा के लिए प्रभु श्री राम का होके रह जाना है
सोचता हू की कितना हसीन पल वो होगा
जब भगवन विनाश के बाद नव निर्वाण लाएंगे
कलयुग का जब होगा अंत और सतयुग फिर से बसाएंगे
के हे प्रभू अब तो आना पड़ेगा आपको धरा पर
सिखलाने यह पाठ जीवित प्राणियों को
की चाहे कितना ही बुद्धिमान वो बनले लेकिन मिलता नहीं स्थान गो लोक में किसी अहंकारी को
किसी अहं......कारी को
By Harsh Goyal

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