ये आँखें
By Amarjit Kaur
चहकती गुनगुनाती आँखें, विचलित भयभीत आँखें,
नटखट चुलबुली आँखें, उदास ख़ामोश आँखें,
सौम्य शांत सी आँखें, तो कहीं आगबबूला आँखें,
कुछ ना कहते हुए भी बोलती आँखें।
आँखों से आँसू यूं ही छलक पड़ते हैं,
जब मन में भावनाओं के तूफ़ान उमड़ते हैं।
आँखें खुशी में हँस भी पड़ती हैं,
सारे चेहरे पर खुशी के रंग भर देती हैं।
कितने गीत, कितनी गज़लों और नज्मों की जान हैं आंखें,
रंगों की दुनिया दिखाएं, नज़राना हैं ये आंखें।
आँखों में है कशिश, आखों में हैं जज़्बात,
ये किसी का होकर बदल दें हालात।
आँखें हैं मन का आईना, ये हैं झूठ से परे,
बिन आँखों के कैसा होगा जीवन ये सोच के मन डरे।
बिन आँखों के गहरा काला है ये जीवन,
हम खुशनसीब हैं कि देख सकते हैं सुबह की पहली किरण।
हम भी किसी के जीवन में रंग भर सकते हैं,
एक अनमोल दान,नेत्रदान कर सकते हैं।
हम रहें ना रहें, इन आँखों का नूर ना फिर कम होगा,
ना जाने कितनों के स्याह जीवन में दिया रोशन होगा।
By Amarjit Kaur

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