यादें
By Shivpriya Khude
याद हैं मुझे अपनी पहली मुलाकात
याद हैं मुझे आपने बिताये हुवे सारे पल
वो हस्ती मुस्कुराती बाते.
तो कभी मेरे रोते हुवे आपके पास आना
इक दूसरे को सभालते सभालाते
हमने कितने दिन गुजरलिये
देखो ना अभी तो मिले थे
बितते बिताते कितना समय बीत गया
तुम्हारा और हमारा रिश्ता इतना गेहरा होता गया.
अब साथ नहीं होगा तो कैसा होगा
साथ तुम्हारा था इसलिए
दिन ऐसे बीत गये.
अब हर कोई अपनी मंजिल की तरफ़ जा रहा हैं.
जारी हु मैं भी मेरे साथ यादों का संदूक भरके.
तुम्हारे साथ बिताये हुऐ हर पल को मेरी कविता मैं पिरोकर
रखुंगी उसको हर दम ताज़ा
जैसे हो मेरे साथ हर पल..
हर बात बाटने के लिये जैसे हो तयार ..
By Shivpriya Khude

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