यादें
By Nisha Shahi
तुम्हारी यादें बहुत सताती है।
घर के हर कोने में एक तस्वीर से छप जाती है
तुम्हारी यादें बहुत सताती है
घर के हर कोने में एक तस्वीर सी छप जाती है
सोफे पर लेटकर तुम्हारा टीवी देखना
हर रोज सुबह अखबार के लिए शोर मचाना
यह सब सोचकर मेरी जान से निकल जाती है
फिर अचानक से हवा की एक हल्की सी लहर आती है
और मेरे कानों में हल्के से बुदबुदा जाती है
कहती है कि जिसकी यादों में तू खोई है
अब उसका वापस आना नामुमकिन है
फिर दिल में ख्याल आता है
काश तुम इतने अच्छे ना होते तो यह यादें भी ना होती
काश तुम इतने अच्छे ना होते तो यह यादें भी ना होती
अब तो सिर्फ तुम्हारी मीठी यादें हैं जो मुझे बहुत सताती है।
By Nisha Shahi

Comments