याद है तुम्हे वो बाते हमारी?
By Shlok Jain
याद है तुम्हे वो बाते हमारी?
साथ रहने की जो अकसर हम किया करते थे।
याद है वो महोबत के झूठे वादे?
जिनसे अकसर हम अपना दिल बहलाया करते थे।
खो देते थे खुद को तुम में,
आज भी खुद को तलाश रहे है,
तुम्हारे जाने के बाद,
आज भी खुद को संभाल रहे है।
सुना है अब तुम पहले जैसी नहीं रही,
बदल तो दी थी तुमने मेरी जिंदगी,
फिर क्या हुआ? जो तुम पहली जैसी ना रही।
उमीद है याद तो आती नहीं होगी मेरी,
फिर भी आ जाए तो फोन मत करना कभी।
एक एक करके समेट रहा हु खुद को,
डर है, फिर से कही टूटे पत्तो की तरह बिखर ना जाऊं।
कई लोग मुझे अब भी मिला करते है,
कई बार तेरी बाते भी किया करते है,
नफरत होती है उन लोगो से,
जो तुम्हे कोसा करते है,
क्योंकि तुमसे तो नही हुआ,
पर हम तो आज भी प्यार तुम्ही से करते है।।
By Shlok Jain

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