याद बहोत आती है!
By Sakshi Joshi
याद बहोत आती है,
वो उम्र जो तुम संग बीती,
नहीं थी जिंदगी अकेली कभी!
हर उस हँसी में जब,
मन अकेला लगता है!
मन के भीतर ग़म मे,
तुम संग बीती यादों का,
मेला लगता है!
माना तुम करीब ही हो,
पर जब आँसू बह जातें है,
और पास तुम ना हों!
मन के भीतर चुपके से,
याद तुमारी आती है!
हर उस पल, उस लम्हे में,
मायके के सुने अंगने में,
याद तुमारी आती है!
जिस संग बचपन बिता,
क्यूँ? वो बहनें ब्याह कर,
किसी और घर चली जाती हैं!
मायके की यादें
By Sakshi Joshi

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