यही तो जिंदगी है दोस्त
By Kuldeep Kumar
कुछ छिन गया तुमसे, कुछ छीन लिया तुमने, कुछ पाया है तुमको, कुछ खो गया तुमसे, कुछ चला गया तो कुछ आया नया, किस बात का है अफ़सोस यही तो जिंदगी है दोस्त कुछ वादे तुमने किये, कुछ वादे तुमसे हुए कुछ हो सके पूरे तो कुछ तुम भी मुकर गए वादों की ये दास्ताँ बदलती रहती है हर रोज यही तो जिंदगी है दोस्त
इंतज़ार किया तुमने किसी का, तुम्हारी भी राह देखी किसी ने सब्र का बाँध टूटा किसी का, समझी नहीं बेबसी किसी ने, करते रहे साबित खुद को, निकलता रहा तुम्हारा ही दोष यही तो जिंदगी है दोस्त तड़पा है जो तू कभी तो तड़पाया किसी को होगा तूने, इक इक पल को तरसा है तो इक पल तरसाया भी होगा तूने छलके होंगे आंसू कभी बेइन्तहा, कभी रहा होगा खामोश यही तो जिंदगी है दोस्त
By Kuldeep Kumar

Comments