यह दिल में दबी जो बातें हैं
By Menka Gupta
यह दिल में दबी जो बातें हैं.......
कैसे करूँ किसीसे उनका दीदार।
बेखबर नादान यह कुछ नहीं समझता है.......
कर बैठता है फिर मेरा दिल मुझि से तकरार।
इतनी सी मुस्कराहट पर दिल मेरा......
एक उस ख़ुशी के लिए हो जाता है बस तैयार।
इतने ख्वाब सजा कर फिर जब दुनिआ बना लेती हु
तब गूंजती है दिल में बातें हज़ार।
लफ्ज़ भी उछल उछल कर जब उड़ाते हैं मज़ाक.....
तब यह दिल ही होता है मेरे पास
नजाने कितना कुछ कहता है
किस मोर पर ले जाने की तमन्ना रखता है
मगर भर जाता है आंसुओं से जब ये दिल.......
फिर गीली पलकों का भोज भी ये सेहता है
यह दिल ही है मेरा जो सबकुछ कहता है
किसे जाकर कहूं...... क्या कहूं
दिल के इस राज़ को किस्से कहूं ........
यह दिल में दबी जो बातें हैं......
उनका दीदार कैसे करू...... किसे करू........
By Menka Gupta

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