मोहब्बत का न करना...
Updated: Dec 5, 2022
By Tarif Mustafa Khan
अब तुझसे मोहब्बत करना है मोहब्बत का न करना,
पड़ा है हमे भी इस ज़िन्दगी में ये कैसा तजुर्बा करना।
मगर अफ़सोस मुझको नहीं इस किस्से के किसी हिस्से का,
जन्नत जाना है बहोत रह न पाने का क्या शिकवा करना।
तू वो है जिसने मुझे ख़ुशी का मतलब समझाया,
तेरी मोहब्बत है तेरा मुझसे यूँ फासला करना।
मैं तुझे अपनी ज़िन्दगी में चाहता हूँ मेरे साथी लेकिन,
साथ रहने को ज़रूरी तो नहीं मेरा तेरी मांग भरना।
जानता हूँ की तू मेरी हो न सकेगी मेरी महबूब बन कर,
रूह का रूह से भी तो एक रिश्ता है उसे जिस्म से क्या करना ।
अगर ये माने की हमे सिर्फ एक शख्स से ही इश्क हो सकता है,
तो अब हमे तो होगा अपनी ज़िन्दगी से मोहब्बत को तर्क करना।
ये माना हम एक दूसरे के हमसफ़र बनकर नहीं रहेंगे,
मगर क्या जायज़ वजह है इस वजह से रिश्ता कता करना।
सच है की जिंदगियों में हमारी जो हमारे बाद आएंगे,
फ़र्ज़ है हमारा उनसे दावा नहीं हकीकी मोहब्बत करना।
मगर मोहब्बत मालियत नहीं जो किसी के हिस्से की किसी को देनी पड़े,
मोहब्बत का ऐसा तसव्वुर है मिलकियत का तसव्वुर करना।
हरगिज़ मुमकिन नहीं किसी के लिए किसी और की जगह भरना,
रिश्तों का रिश्तों से फुजूल है मुकाबला करना ।
बावजूद इन बातों के मेरे होने से जो तेरी ज़िन्दगी ज़रा भी मुश्किल हो,
तू मुझसे कभी कोई कैसा भी न राप्ता करना,
क्यूंकि अच्छी बुरी सही ग़लत हर बात ग़ैर ज़रूरी है,
ज़रूरी है तो बस खुशियों का तुझे रौशन करना।
तू मुझे याद करे तो मुस्कुराये मैं तुझे याद कर के हंसू,
इसी ज़रिये है हमें हमारी मोहब्बत को मुक़म्मल करना।
By Tarif Mustafa Khan

Comments