मोहब्बत
By Vidhi Sharma
मोहब्बत हो गई है उनसे
उनको बता दे क्या ?
जो हाल है दर्द-ए-दिल का
उन्हें सुना दे क्या ?
दिल में जो छुपी है बात कई दिनों से
उससे पर्दा उठा दे क्या ?
उनको अपनी वफाओं से सजाना है
सजादे क्या ?
भरी महफिल में उन्हें अपनाना है
अपनाले क्या ?
सबके आगे अपना उन्हें कहना है
केहदे क्या ?
कोई मिला है रास्ते में ज़रिए की तरह
ज़रिए को ही मंज़िल बना ले क्या ?
कोई मिला है दोपहर में छांव की तरह
उसे ही छत बना ले क्या ?
उनसे कह तो देंगे हम अपने दिल की बात
पर वो समझेंगे क्या ?
अगर वो हमे समझ भी गए तो
ये लोग मानेंगे क्या ?
हो गया है इश्क इस जमाने की रीत के खिलाफ
अब ये दुनिया हमे साथ जीने देगी क्या ?
इतना सोचने के बाद लगता है कि
सबके खिलाफ जा कर हाल-ए-दिल बयां करके
उस जान से प्यारे शक्श को खोएगी क्या ?
क्योंकि सभी को इज्जत, समाज की पड़ी है
हमारी खुशी से लोगो को क्या ?
By Vidhi Sharma

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