मोहन रे
By Raj
सागर में कतरे की भांति, मैं हूं तेरी जोगन रे,
मोहन रे मोहन रे सुन ले मेरी मोहन रे ...
चैन ना आवे , मुझे राते खावे,
प्रीत तेरी मुझे ओढ़न दे,
मोहन रे मोहन रे ,मुझ को तेरी ओढ़न दे ।
सांझ ढली है, पीड़ा बड़ी है ,
दिखे ना मुझको मोहन रे,....
जोगन मैं, जोगन मैं, प्रीत में तेरी जोगन मैं....
ओ सांवरे, ओ सांवरे....
गरजे बदरिया, पूछे मोहे,
अगन सा दहके यौवन रे,
मोहन रे ,मोहन रे,,,, मैं राधा तू मोहन है,
ओ श्यामा सांवरे ओ श्यामा सांवरे .....
दीप निहारू, श्याम पुकारू
स्याही रातें सौतन रे...
मोहन रे ... मोहन रे... मेरे नैनन को रोगन दें ...
ओ कान्हा रे ओ कान्हा रे ....
अंधयारी मन की गलियां है,
धूल पगों की मांग में डारूं..
खिल जाए प्रीत की कलियां रे...
दरस दो कान्हा कर दो मोहे रोशन रे...
मोहन रे... मोहन रे...प्रीत में तेरी जोगन मैं ..
By Raj

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